कई बार हमारे मन में सवाल आते है की हम कौन है और ये सब क्यों क्र रहे है।  बचपन से हे मेरे मन में पढ़ाई को लेकर यही सवाल रहा है की क्यों ? क्यों करू मैं पढाई ? क्या होगा पढ़ क्र के ? वो लोग जो बोहोत पढ़ते है वो भी तोह कुछ खास नहीं कर पाए है।  तोह मैं क्यों ? आज २४ सालो बाद मुझे इस सवाल का जवाब मिला।  इस जवाब को ढूंढ़ने मैं मैने अपनी एक तरीके से नौकरी गवाई कुछ दोस्त और थोड़ा आत्मा सम्मान।

जवाब क्या है ? सोचो अगर जब तुम पैदा हुए थे और कोई तुम्हे चलना नहीं सीखाता तोह ये पूरा समाज जिंदगी भर बस रेंगता रहता।  इस प्रक्रिया में हम अपने पैरो का ख्याल रखते है , उसे जिस भी चीज़ की , जिस भी चीज की जिस भी पौषण की जरुरत होती है उसे देते है। जिंदगी भी कुछ इसी तरह है।  हमें सीखने की जरुरत इसलिए है ताकि हम आगे बढ़ सके।  अगर चलना आ गया है तोह दौड़ना सीख सखे। हर बार जब गिरे तोह उठ खड़ा होना सीख सखे।

इसी के चलते आज मेने खाना बनाया।  दाल , चावल और आलू की सब्जी। शुरुआत हुई उसी से जिससे सबकी होती है आज कल के वक्त में।  गूगल से। ” लंच डिशेस फॉर कुमाऊनी ” .  पहला ही जवाब मिला ,”आलू के गुटके ” |  बस फिर क्या था।
मेरे अंदर का कुमाऊनी जाग उठा और मेने निर्णय किया की अब कुछ भी हो मैं आज यही खाने वाली हूँ। झटपट मेने उसमे इस्तेमाल होने वाली सामग्री देखि। क्या क्या जरुरी था वो ढूंढा और चल पड़ी बाजार की तरफ सामान लाने।

दुकान पोहोची तोह दुकानदार बोले क्या बात बेटी आज तुम कुछ अलग अलग सामान ले रही हो।  कुछ ख़ास बनाने वाली हो क्या ?  चहकते हुए मैं बोली हाँ बनाने वाली तोह हूँ।  सारा सामान ले के में घर पोहोची और फिर बस शुरू हो गयी। आलू उबलने रखे और सोचा थोड़ी देर बैठ जाती हूँ। बैठी ही थी की कुकर में से सारा पानी जा गैस में गिरा। कुकर खोला तोह पता चला की कुकर में आलू ज्यादा थे और पानी बहार ही आना था। फिर  क्या , शुरू हुआ इंतज़ार , की कब गैस पर गिरा हुआ पानी सूखेगा और  मैं गैस फिर से चालू कर पाऊँगी।  कुछ आधा घंटे बाद गैस पर से पानी थोड़ा सूखा और मेने डाल दिया कुकर फिर से गैस पर। उसी बीच फिर गूगल बाबा को याद किया गया।  पीली दाल कैसे बनाते है वो देखा गया।

फिर क्या था।  थोड़ी जद्दो जाहिद के बाद मेरे पास एक सब्जी थी, दाल और चावल। कल पहली बार मेने काफी समय बाद खाना बनाया था।अच्छा लगा।  जान गयी हूँ में की मैं खाना बना सकती हूँ। या यूँ कहा जाये की आलू बना  सकती हूँ। और दाल भी , वो भी एकदम बढ़िया तरीके से।

तोह क्या अब इसका तात्पर्य यही है की में सब छोर छार कर कुक बन जाऊ ? नहीं। कल सीखा मेने की जिंदगी में अलग अलग चीज़े सीखनी चाइये ताकि हम आगे बढ़ सके और जिंदगी का आनंद ले सके।

इसी सोच के साथ, आज के लिए अलविदा। 

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